प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे विशेषज्ञ तैयार करना है, जिनके पास जैविक प्रणालियों के अनुसंधान, संरक्षण और आर्थिक तथा चिकित्सा उद्देश्यों के लिए उनके उपयोग से संबंधित दक्षताएँ हों। अध्ययन के दौरान विद्यार्थी जैविक, जैव-अभियांत्रिकी, जैव-चिकित्सीय और पर्यावरण संरक्षण प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ जैव संसाधनों की निगरानी और पुनर्स्थापना की विधियाँ सीखते हैं। विषयों का एक विशेष खंड स्नातकों को शिक्षण कार्य के लिए भी तैयार करता है। स्नातक कार्यक्रम में तीन अध्ययन प्रोफाइल («अनुकूलन प्रक्रियाओं की जैव-रसायनिकी और शरीरक्रियाविज्ञान», «आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवविज्ञान और जैव-प्रौद्योगिकी», «पारिस्थितिकी तंत्रों का सतत विकास») शामिल हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को संबंधित क्षेत्रों में अधिक गहन ज्ञान प्रदान करना है।









