प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे
इस अध्ययन कार्यक्रम का विषय सैद्धांतिक लोकसाहित्य-विज्ञान और सांस्कृतिक मानवविज्ञान है—वे विषय जो सांस्कृतिक परंपराओं के संगठन के सिद्धांतों (उनकी टाइपोलॉजी), साथ ही पौराणिक चिंतन की संरचना और अनुष्ठानबद्ध व्यवहार का अध्ययन करते हैं। समकालीन लोकसाहित्य-विज्ञान की सीमाएँ विषय-वस्तु और पद्धति—दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत व्यापक हैं। पारंपरिक लोकसाहित्य की विधाओं के अलावा, आज इसके अध्ययन के विषयों में शहर के मौखिक, दृश्य और क्रियात्मक पाठ (उत्तर-लोकसाहित्य), साथ ही भाषिक रूपों और कथनों की विविधतम शैलियाँ भी शामिल हैं, जिनमें व्यापक अर्थ में पौराणिक जानकारी निहित होती है।












